मगर आज हमारे लिए शिक्षा जीविका कमाने का साधन मात्र बनकर रह गई है। हमारे संस्कार, नीतियाँ और परंपराएँ बहुत पीछे छूट गए हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली यथार्थ और व्यवहारिक ज्ञान से बहुत दूर है।
यह सिर्फ आधुनिकता के बात करते हैं और संस्कृति भावनाओं और अध्यात्म से कोसों दूर है।
यह आधुनिकता अपने विकास और प्रगति के नाम पर प्रकृति व हर उस चीज़ का शोषण करती है , जो उसके मार्ग पर बाधा है या जिसके विनाश से उसे कुछ हासिल हो सकता है।
इसका उद्देश्य केवल मानव को रोजी-रोटी दिलाना है इसका मानवता और मानवीय संवेदना से कोई संबंध नहीं है।ऐसी शिक्षा से युक्त व्यक्ति उच्चमहत्वकांक्षाओं का गुलाम होता है। उसे हर व्यक्ति अपने से छोटा ही दिखाई देता है।
ऐसी शिक्षा से वह अपने बड़े बड़े महल खड़े कर सकता है धन का अंबार लगा सकता है , मगर वह मानवीय संवेदना कहां से लाए जो प्राचीन शिक्षा का आधार हुआ करती थी!
आधुनिक शिक्षा प्रणाली के स्वयं भी बहुत से लाभ हैं।
आज मानव के पास हर प्रकार की सुख सुविधाएं हैं और उसने रोगों पर भी कई प्रकार से विजय पाई है ,
मगर कहीं ना कहीं वह अपने आप को खो चुका है।
इस आधुनिकता ने मानव से उसकी मानवता छीन ली है।
उसके संस्कार , उसकी परम्पराओं को दबा दिया है।
छोटे छोटे बच्चे अपराधों का शिकार बन रहे हैं क्युकी उन्हे कोई इंसानियत की शिक्षा नहीं देता ,
उन्हे सिर्फ आधुनिकता में जीने और धनोपार्जन की
शिक्षा दी जाती है।
इसे बचाने का एकमात्र साधन है कि शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक किताबें भी जोड़ दी जाएं ,
जिससे आने वाला कल एक स्वच्छ मानव और चरित्रवान बच्चों का समाज तैयार हो सके।
वर्तमान में इसकी सबसे अच्छी पहल संत रामपाल जी शिष्यों द्वारा की जा रही है जिनके घर के छोटे बच्चे भी आध्यात्मिक पुस्तकों को पढ़ते हैं। कुरीतियों से बहुत दूर और आध्यात्मिकता की ओर बढ़कर मानवता को कायम कर रहे हैं। इससे एक बहुत ही अच्छे समाज का निर्माण हो रहा है।
आज जानिए उस अद्भुत पुस्तक के बारे में जो आज लाखों लोगो का जीवन बदल चुकी हैं , उन्हें एक जीने की नई दिशा प्रदान की है , जिस से एक शैतान जैसा इंसान भी सुधारकर एक नेक इंसान बन जाता है।
इस पुस्तक को हम सभी को पढ़ना चाहिए जिस से हमें अपने मानव जीवन के मूल उद्देश्य का पत लगे।
उस पुस्तक को सभी स्कूलों और कॉलेज में भी ये पुस्तके अनिवार्य कर देनी चाहिए जिस से एक सच्चे और अच्छे समाज का निर्माण हो सके।
आप भी अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक को
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अगर ऐसे ही हर स्कूल कॉलेज में आध्यात्मिक पुस्तकें अनिवार्य कर दी जाए तो ना केवल मानवता की रक्षा होगी बल्कि प्रकृति और हमारी संस्कृति सब फिर से जीवित होने लग जाएंगे
और एक बेहतर समाज का निर्माण होगा।
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